Friday, July 22, 2022
भगवान की मजदूरी - Gaurishankar Chaubey
Sunday, July 10, 2022
हकीकत
Thursday, January 6, 2022
" ये कहानी आपके जीने की सोच बदल देगी "
एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया।
वह बैल घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ। किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी।
जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया...... अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।
जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ आता जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह बैल कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया |
ध्यान रखे आपके जीवन में भी बहुत तरह से मिट्टी फेंकी जायेगी बहुत तरह की गंदगी आप पर गिरेगी जैसे कि,
आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही आपकी आलोचना करेगा.
कोई आपकी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा.
कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे...
ऐसे में आपको हतोत्साहित हो कर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हर तरह की गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख ले कर उसे सीढ़ी बनाकर बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है।
सकारात्मक रहे.. सकारात्मक जिए!
इस संसार में....
सबसे बड़ी सम्पत्ति "बुद्धि "
सबसे अच्छा हथियार "धैर्य"
सबसे अच्छी सुरक्षा "विश्वास"
सबसे बढ़िया दवा "हँसी" है
और आश्चर्य की बात कि "ये सब निशुल्क हैं "
"सोच बदलो जिंदगी बदल जायेगी"🙏
Friday, August 27, 2021
"आप कर्म करते रहिये, ज़िंदगी आपको खूबसूरत मौके प्रदान करती रहेगी I
गरीब बच्चा
एक पांच छ साल का मासूम सा बच्चा अपनी छोटी बहन को लेकर मंदिर के एक तरफ कोने में बैठा हाथ जोड़कर भगवान से न जाने क्या मांग रहा था. कपड़े में मैल लगा हुआ था मगर निहायत साफ, उसके नन्हे नन्हे से गाल आँसूओ से भीग चुके थे. बहुत लोग उसकी तरफ आकर्षित थे और वह बिल्कुल अनजान अपने भगवान से बातों में लगा हुआ था. जैसे ही एक अजनबी ने बढ़ के उसका नन्हा सा हाथ पकड़ा और पूछा: क्या मांगा भगवान से ??
उसने कहा: मेरे पापा मर गए हैं.. उनके लिए स्वर्ग, मेरी माँ रोती रहती है.. उनके लिए सब्र और मेरी बहन के लिए कपड़े के पैसे. तुम स्कूल जाते हो ?? अजनबी का सवाल.... स्वाभाविक सा सवाल था, हा जाता हू.. उसने कहा किस क्लास में पढ़ते हो ?.... अजनबी ने पूछा, नहीं अंकल में पढ़ने नहीं जाता, माँ चने बना देती है वही स्कूल के बच्चों को बेचता हू बहुत सारे बच्चे मुझसे चने खरीदते हैं, हमारा यही काम धंधा है।
बच्चे का एक - एक शब्द मेरी रूह में उतर रहा था, तुम्हारा कोई रिश्तेदार ? न चाहते हुए भी अजनबी बच्चे से पूछ बैठा, पता नहीं... माँ कहती है गरीब का कोई रिश्तेदार नहीं होता माँ झूठ नहीं बोलती.... पर अंकल, मुझे लगता है मेरी माँ कभी कभी झूठ बोलती है.
जब हम खाना खाते हैं हमें देखती रहती है, जब कहता हुं माँ तुम भी खाओ, तो कहती हैं मैने खा लिया था उस समय लगता है झूठ बोलती है.
बेटा, अगर तुम्हारे घर का खर्च मिल जाय तो पढ़ाई करोगे ? बिल्कुल नहीं!! क्यों ? पढ़ाई करने वाले... गरीबों से नफरत करते हैं अंकल, हमें किसी पढ़े हुए ने कभी नहीं पूछा पास से गुजर जाते हैं.
अजनबी हैरान भी था और शर्मिंदा भी, फिर उसने कहा हर दिन इस मंदिर में आता हू, कभी किसी ने नहीं पूछा यहाँ सब आने वाले मेरे पिताजी को जानते थे, मगर हमें कोई नहीं जानता.
बच्चे ने मायूसी से पूछा अंकल, जब बाप मर जाता है तो सब अजनबी क्यों हो जाते हैं?
"अजनबी के पास इसका कोई जवाब नही था".
*ऐसे कितने मासूम होंगे जो हसरतों से घायल हैं बस एक कोशिश कीजिये और अपने असपास ऐसे जरूरतमंद यतीमों, बेसहाराओ को ढूंढिये और उनकी मदद कीजिए*
मंदिर में सीमेंट या अन्न की बोरी देने से पहले अपने आस-पास किसी गरीब को देख लेना, शायद उसको आटे की बोरी की ज्यादा जरूरत हो।🙏🙏
स्वस्थ रहे ।। मस्त रहे ।। व्यस्थ रहे
गौरीशंकर चौबे
Monday, July 19, 2021
नेक कर्म
टूटी चप्पल
"पता नहीं ये सामने वाला सेठ हफ्ते में 3-4 बार अपनी चप्पल कैसे तोड़ लाता है?"
मोची बुदबुदाया, नजर सामने की बड़ी किराना दूकान पर बैठे सेठ पर थी। हर बार जब उस मोची के पास कोई काम ना होता तो उस सेठ का नौकर सेठ की टूटी चप्पल बनाने को दे जाता।
मोची अपनी पूरी लगन से वो चप्पल सी देता की अब तो 2-3 महीने नहीं टूटने वाली। सेठ का नौकर आता और बिना मोलभाव किये पैसे देकर उस मोची से चप्पल ले जाता। पर 2-3 दिन बाद फिर वही चप्पल टूटी हुई उस मोची के पास पहुंच जाती।
आज फिर सुबह हुई, फिर सूरज निकला। सेठ का नौकर दूकान की झाड़ू लगा रहा था। और सेठ, अपनी चप्पल तोड़ने में लगा था , पूरी मश्शकत के बाद जब चप्पल न टूटी तो उसने नौकर को आवाज लगाई। "अरे रामधन इसका कुछ कर, ये मंगू भी पता नहीं कौनसे धागे से चप्पल सिलता है, टूटती ही नहीं।
"रामधन आज सारी गांठे खोल लेना चाहता था "सेठ जी मुझे तो आपका ये हर बार का नाटक समझ में नहीं आता। खुद ही चप्पल तोड़ते हो फिर खुद ही जुडवाने के लिए उस मंगू के पास भेज देते हो।"
सेठ को चप्पल तोड़ने में सफलता मिल चुकी थी। उसने टूटी चप्पल रामधन को थमाई और रहस्य की परते खोली "देख रामधन जिस दिन मंगू के पास कोई ग्राहक नहीं आता उसदिन ही मैं अपनी चप्पल तोड़ता हूं, क्योंकी मुझे पता है, मंगू गरीब है, पर स्वाभिमानी है, मेरे इस नाटक से अगर उसका स्वाभिमान और मेरी मदद दोनों शर्मिंदा होने से बच जाते है तो क्या बुरा है।
आसमान साफ था पर रामधन की आँखों के बादल बरसने को बेक़रार थे।
लाकडाउन के कारण हमारे आसपास आज ऐसे अनेकों परिवार होंगे जिनके रोजगार छूट गये होंगे।अपने आसपास के किसी एक की चिंता यदि हम कर सकें तो बहुत बड़ी समस्या के समाधान में हम सहायक हो सकते हैं।
🌳पर हित सरस धर्म नहीं भाई ।
पर पीड़ा सम नहीं अधमाई।।🌳
सभी को कुछ न कुछ जो बन पड़े दूसरों के दुख दर्द को बांटने का प्रयास करते रहना चाहिए, इससे जो आत्म सन्तुष्टि मिलेगी यकीन मानिए कई लाख और करोड़ खर्च कर देने पर भी दुनिया मे कही नही मिलेगी।
स्वस्थ रहे ।। मस्त रहे ।। व्यस्थ रहे
गौरीशंकर चौबे
Saturday, July 3, 2021
भक्ति में ही शक्ति है
~ प्रभु का पत्र ~
मेरे प्रिय....
सुबह तुम जैसे ही सो कर उठे में तुम्हारे बिस्तर के पास ही खड़ा था। मुझे लगा की तुम मुझसे कुछ बात करोगे। तुम कल या पिछले हफ्ते हुई किसी बात या घटना के लिये मुझे धन्यवाद कहोगे। लेकिन तुम फटाफट चाय पी कर तैयार होने चले गए और मेरी तरफ देखा भी नहीं।
फिर मैंने सोचा की तुम नहा के मुझे याद करोगे। पर तुम इस उलझन में लग गये की तुम्हे आज कौन से कपड़े पहनने हैं!! फिर जब तुम जल्दी से नाश्ता कर रहे थे और अपने ऑफिस के कागज इकठे करने के लिये घर में इधर से उधर दौड़ रहे थे.... तो भी मुझे लगा की शायद अब तुम्हे मेरा ध्यान आयेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
फिर जब तुमने ओफिस जाने के लिए ट्रेन पकड़ी तो में समझा की इस खाली समय का उपयोग तुम मुझसे बातचीत करने में करोगे। पर तुमने थोड़ी देर पेपर पढ़ा और फिर खेलने लग गए अपने मोबाइल में और में खड़ा का खड़ा ही रह गया।
में तुम्हें बताना चाहता था कि दिन का कुछ हिस्सा मेरे साथ बिता कर तो देखो, तुम्हारे काम और भी अच्छी तरह से होने लगेंगे, लेकिन तुमनें मुझसे बात ही नहीं की। एक मौका ऐसा भी आया जब तुम बिलकुल खाली थे और कुर्सी पर पूरे 15 मिनट यू ही बैठे रहे, लेकिन तब भी तुम्हें मेरा ध्यान नहीं आया।
दिन का अब भी काफी समय बचा था। मुझे लगा की शायद इस बचे समय में हमारी बात हो जाएगी.... लेकिन घर पँहुचने के बाद, तुम रोज के कामों में व्यस्त हो गये। जब वे काम निपट गये तुमने टीवी खोल लिया और घंटो टीवी देखते रहे। और देर रात थककर तुम बिस्तर पर आ लेटे।
तुमनें अपनी पत्नी, बच्चों को शुभरात्री कहा और चुपचाप चादर ओढकर सो गये।
मेरा बड़ा मन था कि में भी तुम्हारी दिनचर्या का हिस्सा बनू..
तुम्हारे साथ कुछ वक्त बिताऊँ ..
तुम्हारी कुछ सुनु... तुम्हे कुछ सुनाऊँ। कुछ मार्गदर्शन करुँ तुम्हारा ताकि तुम्हें समझ आए कि तुम किस लिए इस धरती पर आए हो और किन कामों में उलझ गए हो... लेकिन, तुम्हें समय ही नहीं मिला और में मन मार कर ही रह गया।
में तुमसे बहुत प्रेम करता हूँ।
हर रोज़ में इस बात का इन्तज़ार करता हूँ कि तुम मेरा ध्यान करोगे और अपनी छोटी छोटी खुशियों के लिए मेरा धन्यवाद करोगे।
पर तुम तब ही आते हो जब तुम्हें कुछ चाहिए होता है। तुम जल्दी में आते हो और अपनी माँगे मेरे आगे रख के चले जाते हो। और मजे की बात तो यह है कि इस प्रक्रिया में तुम मेरी तरफ देखते भी नहीं।
खैर कोई बात नहीं....
हो सकता है कल तुम्हें मेरी याद आ जाये।
ऐसा मुझे विश्वास है और मुझे तुम में आस्था है। आखिरकार मेरा दूसरा नाम... " आस्था और विश्वास ही तो है"।
तुम्हारा ईश्वर....
~ संदेश ~
"अच्छे समय में अगर हम भगवान को शुक्रिया अदा नहीं करते, तो खराब समय के लिए भगवान को जिम्मेदार ठहराने का हमें कोई हक नहीं".
स्वस्थ रहे ।। मस्त रहे।। व्यस्थ रहे
सदैव मुस्कुराते रहे
गौरीशंकर चौबे

































