Tuesday, June 22, 2021

सकारात्मक सोच


~ सकारात्मक सोच ~ 


  एक मेंढकों की टोली जंगल के रास्ते से जा रही थी. अचानक दो मेंढक एक गहरे गड्ढे में गिर गये. जब दूसरे मेंढकों ने देखा कि गढ्ढा बहुत गहरा है तो ऊपर खड़े सभी मेढक चिल्लाने लगे ‘तुम दोनों इस गढ्ढे से नहीं निकल सकते, गढ्ढा बहुत गहरा है, तुम दोनों इसमें से निकलने की उम्मीद छोड़ दो. 


उन दोनों मेढकों ने शायद ऊपर खड़े मेंढकों की बात नहीं सुनी और गड्ढे से निकलने की लिए लगातार वो उछलते रहे. बाहर खड़े मेंढक लगातार कहते रहे ‘ तुम दोनों बेकार में मेहनत कर रहे हो, तुम्हें हार मान लेनी चाहियें, तुम दोनों को हार मान लेनी चाहियें. तुम नहीं निकल सकते.


गड्ढे में गिरे दोनों मेढकों में से एक मेंढक ने ऊपर खड़े मेंढकों की बात सुन ली, और उछलना छोड़ कर वो निराश होकर एक कोने में बैठ गया. दूसरे  मेंढक ने  प्रयास जारी रखा, वो उछलता रहा जितना वो उछल सकता था.


बहार खड़े सभी मेंढक लगातार कह रहे थे कि तुम्हें हार मान लेनी चाहियें पर वो मेंढक शायद उनकी बात नहीं सुन पा रहा था और उछलता रहा और काफी कोशिशों के बाद वो बाहर आ गया.  दूसरे मेंढकों ने कहा ‘क्या तुमने हमारी बात नहीं सुनी.


उस मेंढक ने इशारा करके बताया की वो उनकी बात नहीं सुन सकता क्योंकि वो बेहरा है सुन नहीं सकता, इसलिए वो किसी की भी बात नहीं सुन पाया. वो तो यह सोच रहा था कि सभी उसका उत्साह बढ़ा रहे हैं.





कहानी से सीख |


             1. जब भी हम बोलते हैं उनका प्रभाव लोगों पर पड़ता है, इसलिए हमेशा सकारात्मक बोलें. 



                   2. लोग चाहें जो भी कहें आप अपने आप पर पूरा विश्वाश रखें और सकरात्मक सोचें.






               3. कड़ी मेहनत, अपने ऊपर विश्वाश और सकारात्मक सोच से ही हमें सफलता मिलती है.






स्वस्थ ।। मस्त ।।व्यस्थ रहे
सदैव मुस्कुराते रहे 


गौरीशंकर चौबे 

Thursday, June 17, 2021

गलतफहमी

 ~ गलतफहमी ~


एक बार एक केकड़ा समुद्र किनारे अपनी मस्ती में चला जा रहा था और बीच - बीच में रुक कर अपने पैरों के निशान देख कर खुश होता। आगे बढ़ता पैरों के निशान देखता और खुश होता। इतने में एक लहर आई और उसके पैरों के सभी निशान मिट गये।

इस पर केकडे को बड़ा गुस्सा आया, उसने लहर से कहा: ए लहर में तो तुझे अपना मित्र मानता था, पर ये तूने क्या किया, मेरे बनाये सुंदर पैरों के निशानों को ही मिटा दिया !!

कैसी दोस्त हो तुम ??

तब लहर बोली :

वो देखो पीछे से मछुआरे पैरों के निशान देख कर केकड़ों को पकड़ने आ रहे हैं। हे मित्र, तुमको वो पकड़ न लें...बस इसलिए मैंने निशान मिटा दिए !!




ये सुनकर केकडे की आँखों में आँसू आ गये।

 सच यही है,

कई बार हम सामने वाले की बातों को समझ नहीं पाते और अपनी सोच अनुसार उसे गलत समझ लेते हैं।

जबकि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, अत: मन में बैर लाने से बेहतर है कि हम सोच समझ कर निष्कर्ष निकालें !!


रिश्ते कभी भी क़ुदरती मौत नहीं मरते, इनको हमेशा इंसान ही कतल करता है, 

नफ़रत से, नज़र अंदाजी से, 

तो कभी " गलतफहमी " से !!



स्वस्थ ।। मस्त ।।व्यस्थ रहे

सदैव मुस्कुराते रहे 


गौरीशंकर चौबे






Saturday, June 5, 2021

कमिया

 "कमिया"


बहुत समय पहले की बात है,  किसी गाँव में एक किसान रहता था। वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनो से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था। इसके लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों और लटका लेता था। उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था, और दूसरा एकदम सही था।

इस वजह से रोज घर पहुँँचते - पहुँँचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था। ऐसा दो सालों से चल रहा था। सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुँचाता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है। वहीं दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पहुँचा पाता है और किसान कि मेहनत बेकार चली जाती है।

फूटा घड़ा ये सब सोचकर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया।  उसने किसान से कहा: में खुद पर शर्मिंदा हुं और आपसे क्षमा मांगना चाहता हुं ?

किसान ने पूछा : क्यों ?

तुम किस बात से शर्मिंदा हो ?


शायद आप नहीं जानते पर में एक जगह से फूटा हुआ हुं और पिछले दो सालो से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था बस उसका आधा ही पंहुचा पाया हुं।

मेरे अन्दर ये बहुत बड़ी कमी है और इस वजह से आपकी मेहनत बर्बाद होती रही है। फूटे घड़े ने दुखी होते हुए कहा।


किसान को घड़े की बात सुनकर थोड़ा दुःख हुआ और वह बोला: कोई बात नहीं .. में चाहता हूँ कि आज लौटते वक़्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुंदर फूलों को देखो।  घड़े ने वैसा ही किया, वह रास्ते भर सुंदर फूलों को देखता आया।  ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई पर घर पहुँँचते - पहुँँचते  फिर उसके अंदर से आधा पानी गिर चुका था.. वो मायूस हो गया और किसान से क्षमा मांगने लगा!! 


किसान बोला शायद तुमने ध्यान नहीं दिया, पूरे रास्ते में जितने भी फूल थे... वो बस तुम्हारी तरफ ही थे, सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था। 


ऐसा इसलिए, क्योकिं,

में हमेशा से तुम्हारे अंदर की कमी को जानता था, और मैंने उसका लाभ उठाया.. मैंने तुम्हारे तरफ वाले रास्ते पर रंग - बिरंगे फूलों के  बिज बो दिए थे। तुम रोज थोड़ा - थोड़ा कर के उन्हें  सीचते रहे और  पूरे रास्ते को फूलो से एकदम खुबसूरत बना दिया। आज तुम्हारी वजह से ही में इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हुं और अपना घर सुंदर बना पाता हुं। तुम्हीं सोचो अगर तुम जैसे हो वैसे नहीं होते तो भला क्या में ये सबकुछ कर पाता ? 




                                                                ~ सिख ~


     दोस्तों हम सभी के अंदर कोई ना कोई कमी होती है, पर यही कमिया हमें अनोखा बनाती हैं। 

        हमें यह  सोचना चाहिए की उस कमी से लाभ उठाकर उसकी कमी को कैसे कम करें। 




                                                                  " संदेश " 


उस किसान की तरह हमें भी हर किसी को वो जैसा है वैसे ही स्वीकार करना चाहिए और उसकी अच्छाई की तरफ ध्यान देना चाहिए। जब हम ऐसा करेंगे तब " फूटा घड़ा " भी " अच्छे घड़े " से मूल्यवान हो जाएगा।






 नमस्ते

गौरीशंकर चौबे

स्वस्थ रहे ।। मस्त रहे।। व्यस्थ रहे.