Wednesday, December 21, 2022

जिंदगी बदलने के लिए दर्द सहो

 दोस्तों जिंदगी में बहुत बार हम कठिनाईयों को देखकर डर जाते हैं और जो कुछ तकलीफें आती हैं उनका बहाना देकर हम अपना लक्ष्य छोड़ देते हैं।

जिसका परिणाम बहुत ही बुरा होता हैं। हम अपने लक्ष्य को कभी प्राप्त ही नहीं कर पाते हैं। ऐसी ही एक कहानी लेकर आया हूँ।



एक बार एक मूर्तिकार एक पत्थर को छेनी और हथौड़ी से काट कर मूर्ति का रूप दे रहा था। जब पत्थर काटा जा रहा था, तो उसको बहुत दर्द हो रहा था।

और वो पत्थर मूर्तिकार के सामने रोने लगा। मूर्तिकार ने पूछा क्यों रो रहे हो भाई, मैं तो तुम्हे भागवान का रूप दे रहा हु, आज तुम ये दर्द बर्दास्त कर लोगे तो लोग कल तुम्हे पूजेंगे।


पत्थर बोला नहीं मुझे दर्द हो रहा है। प्लीज मुझे छोड़ दो।


मूर्तिकार ने उस पत्थर को वही रास्ते में छोड़ दिया और बगल में पड़ा दूसरा पत्थर उठाया और उसकी मूर्ति बना डाली। दूसरे पत्थर ने दर्द बर्दास्त कर किया, और वो भागवान की मूर्ति बन गया।




लोग रोज उसे माला फूल चढाने लगे।


और लोगो ने रास्ते में पड़े उस पत्थर को (जिसने दर्द बर्दास्त नहीं किया था) लाकर उसी मंदिर में रख दिया, ताकी ये नारियल फोड़ने के काम आएगा।


जिस पत्थर ने एक बार दर्द बर्दास्त नहीं किया, आज वो जिंदगीभर दर्द बर्दास्त कर रहा है। और जिसने सही वक़्त पर एक बार दर्द बर्दास्त करना सही समझा वो तो भगवान् बन गया। आज उसके ऊपर माला फूल चढ़ाया जाता हैं।


दोस्तों हमारे लिए ये सही समय है, हमें निर्णय लेने के लिए। की, हमें आज दर्द बर्दास्त करना है, या जिंदगी भर दर्द बर्दास्त करना है। जो लोग खुद का लक्ष्य निर्धारित नहीं कर पाते हैं, वो हमेशा पश्चाताप करते हैं।

क्यों की उन्हें जिंदगी भर दुसरो के हिसाब से जीना पड़ता हैं ।




इसलिए अपना कोई न कोई लक्ष्य जरूर बनायें। फैसला आपका होगा तो मंजिल भी आपकी ही होगी। और हमें तब तक ये दर्द बर्दास्त करना है जबतक की हम अपने लक्ष्य को प्राप्त न कर लें ।


|| स्वस्थ रहे || मस्त रहे || व्यस्त रहे ||















Wednesday, November 16, 2022

पिता का समाज व पुत्रों के नाम पत्र

 लखनऊ के एक उच्चवर्गीय बूढ़े पिता ने अपने पुत्रों के नाम एक चिट्ठी लिखकर खुद को गोली मार ली। 

चिट्टी क्यों लिखी और क्या लिखा। यह जानने से पहले संक्षेप में चिट्टी लिखने की पृष्ठभूमि जान लेना जरूरी है।



पिता सेना में कर्नल के पद से रिटार्यड हुए. वे लखनऊ के एक पॉश कॉलोनी में अपनी पत्नी के साथ रहते थे उनके दो बेटे थे जो सुदूर अमेरिका में रहते थे.  यहां यह बताने की जरूरत नहीं है कि माता-पिता ने अपने लाड़लों को पालने में कोई कोर कसर नहीं रखी.  बच्चे सफलता की सीढ़िंया चढते गए पढ़-लिखकर इतने योग्य हो गए कि दुनिया की सबसे नामी-गिरामी कार्पोरेट कंपनी में उनको नौकरी मिल गई. संयोग से दोनों भाई एक ही देश में,लेकिन अलग-अलग अपने परिवार के साथ रहते थे.




एक दिन अचानक पिता ने रूंआसे गले से बेटों को खबर दी। बेटे! तुम्हारी मां अब इस दुनिया में नहीं रही । पिता अपनी पत्नी की मिट्टी के साथ बेटों के आने का इंतजार करते रहे। एक दिन बाद छोटा बेटा आया, जिसका घर का नाम चिंटू था। 


पिता ने पूछा चिंटू! मुन्ना क्यों नहीं आया। मुन्ना यानी बड़ा बेटा।पिता ने कहा कि उसे फोन मिला, पहली उडान से आये। धर्मानुसार बडे बेटे का आना सोच वृद्व फौजी ने जिद सी पकड़ ली। 


छोटे बेटे के मुंह से एक सच निकल पड़ा। उसने पिता से कहा कि मुन्ना भईया ने कहा कि, "मां की मौत में तुम चले जाओ। पिता जी मरेंगे, तो मैं चला जाऊंगा।"




कर्नल साहब (पिता) कमरे के अंदर गए। खुद को कई बार संभाला फिर उन्होंने  चंद पंक्तियो का एक पत्र लिखा।जो इस प्रकार था- 


प्रिय बेटो

मैंने और तुम्हारी मां ने बहुत सारे अरमानों के साथ तुम लोगों को पाला-पोसा। दुनिया के सारे सुख दिए। देश-दुनिया के बेहतरीन जगहों पर शिक्षा दी। जब तुम्हारी मां अंतिम सांस ले रही थी, तो मैं उसके पास था।वह मरते समय तुम दोनों का चेहरा एक बार देखना चाहती थी और तुम दोनों को बाहों में भर कर चूमना चाहती थी। तुम लोग उसके लिए वही मासूम मुन्ना और चिंटू थे। उसकी मौत के बात उसकी लाश के पास तुम लोगों का इंतजार करने लिए मैं था। मेरा मन कर रहा था कि काश तुम लोग मुझे ढांढस बधाने के लिए मेरे पास होते। मेरी मौत के बाद मेरी लाश के पास तुम लोगों का इंतजार करने के लिए कोई नहीं होगा। सबसे बड़ी बात यह कि मैं नहीं चाहता कि मेरी लाश निपटाने के लिए तुम्हारे बड़े भाई को आना पड़े। इसलिए सबसे अच्छा यह है कि अपनी मां के साथ मुझे भी निपटाकर ही जाओ। मुझे जीने का कोई हक नहीं क्योंकि जिस समाज ने मुझे जीवन भर धन के साथ सम्मान भी दिया, मैंने समाज को असभ्य नागरिक दिये। हाँ अच्छा रहा कि हम अमरीका जाकर नहीं बसे, सच्चाई दब जाती। 


मेरी अंतिम इच्छा है कि मेरे मैडल तथा फोटो बटालियन को लौटाए जाए तथा घर का पैसा नौकरों में बाटा जाऐ। जमापूँजी आधी वृद्ध सेवा केन्द्र में तथा आधी सैनिक कल्याण में दी जाऐ।

                                                                    

तुम्हारा पिता  


कमरे से ठांय की आवाज आई। कर्नल साहब ने खुद को गोली मार ली।


यह क्यों हुआ, किस कारण हुआ? कोई दोषी है या नहीं। मुझे इसके बारे में कुछ नहीं कहना। 





                                       हाँ यह काल्पनिक कहानी नहीं। पूरी तरह सत्य घटना है। 


माँ और पिता ऐसे होते है, जिनके होने का एहसास कभी नहीं होता, लेकिन ना होने का एहसास बहुत होता है। 

















Thursday, October 27, 2022

अच्छी सोच

 

एक महान विद्वान से मिलने के लिये एक दिन रोशनपुर के राजा आये। राजा ने विद्वान से पुछा, ‘क्या इस दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति है जो बहुत महान हो लेकिन उसे दुनिया वाले नहीं जानते हो?’


विद्वान ने राजा से विनम्र भाव से मुस्कुराते हुये कहा, ‘हम दुनिया के ज्यादातर महान लोगों को नहीं जानते हैं।’ दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो महान लोगों से भी कई गुना महान हैं।




राजा ने विद्वान से कहा, ‘ऐसे कैसे संभव है’। विद्वान ने कहा, मैं आपको ऐसे कई व्यक्तियों से मिलवाऊंगा। इतना कहकर विद्वान, राजा को लेकर एक गांव की ओर चल पड़े। रास्ते में कुछ दुर पश्चात् पेड़ के नीचे एक बुढ़ा आदमी वहाँ उनको मिल गया। बुढ़े आदमी के पास एक पानी का घड़ा और कुछ डबल रोटी थी। विद्वान और राजा ने उससे मांगकर डबल रोटी खाई और पानी पिया।


जब राजा उस बूढ़े आदमी को डबल रोटी के दाम देने लगा तो वह आदमी बोला, ‘महोदय, मैं कोई दुकानदार नहीं हूँ। मेरे बेटे का डबल रोटी का व्यापार है, मेरा घर में मन नहीं लगता इसलिये राहगिरों को ठंडा पानी पिलाने और डबल रोटी खिलाने आ जाया करता हूँ। इससे मुझे बहुत खुशी मिलती है।                                           



     "मैं बस वही कर रहा हूँ जो मैं इस उम्र में करने योग्य हूँ "  



विद्वान ने राजा को इशारा देते हुए कहा कि देखो राजन् इस बुढ़े आदमी की इतनी अच्छी सोच ही इसे महान बनाती है।


फिर इतना कहकर दोनों ने गाँव में प्रवेश किया तब उन्हें एक स्कूल नजर आया। स्कूल में उन्होंने एक शिक्षक से मुलाकात की और राजा ने उससे पूछा कि आप इतने विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं तो आपको कितनी तनख्वाह मिलती है। उस शिक्षक ने राजा से कहा कि महाराज मैं तनख्वाह के लिये नहीं पढ़ा रहा हूँ, यहाँ कोई शिक्षक नहीं थे और विद्यार्थियों का भविष्य दाव पर था इस कारण मैं उन्हें मुफ्त में शिक्षा देने आ रहा हूँ।



विद्वान ने राजा से कहा कि महाराज दूसरों के लिये जीने वाला भी बहुत ही महान होता है। और ऐसे कई लोग हैं जिनकी ऐसी महान सोच ही उन्हें महान से भी बड़ा महान बनाती हैं।


इसलिए राजन् अच्छी सोच आदमी का किस्मत निर्धारित करती है।


इसलिए  हमेशा अच्छी बातें ही सोचकर कार्य करें और महान बनें। आदमी बड़ी बातों से नहीं बल्कि अच्छी सोच व अच्छे कामों से महान माना जाता है।




शिक्षा:-    Life में कुछ Achieve करने के लिये और सफलता हासिल करने के लिये बड़ी बातों को ज्यादा Importance देने के बजाय अच्छी सोच को ज्यादा महत्व देना चाहिये क्योंकि आपकी अच्छी सोच ही आपके कार्य को निर्धारित करती है.



मनन अवश्य करें         

                                

    ।। स्वस्थ रहे, मस्त रहे, व्यस्थ रहे ।।               

Wednesday, September 7, 2022

पाजिटीव एवं #निगेटीव एनर्जी - Gaurishankar Chaubey

अमेरिका मे जब एक कैदी को 
फॉसी की सजा सुनाई गई तो 
वहॉ के कुछ बैज्ञानिकों ने सोचा कि 
क्यों न इस कैदी पर कुछ प्रयोग किया जाय ! 
तब कैदी को बताया गया कि 
हमं तुम्हें फॉसी देकर नहीं परन्तु 
जहरीला कोबरा सांप  डसाकर मारेगें !
और उसके सामने 
बड़ा सा जहरीला सांप ले आने के बाद 
कैदी की ऑखे बंद करके कुर्सी से बॉधा गया और 
उसको सॉप नहीं बल्कि दो सेफ्टी पिन्स चुभाई गई !
और यह हुआ कैदी की कुछ सेकेन्ड मे ही मौत हो गई, पोस्टमार्डम के बाद पाया गया कि 
कैदी के शरीर मे सांप  के जहर के समान ही जहर है ।
अब ये जहर कहॉ से आया 
जिसने उस कैदी की जान ले ली ...
वो जहर उसके खुद शरीर ने ही 
सदमे मे उत्पन्न किया था । 
हमारे हर संकल्प से 
#पाजिटीव एवं #निगेटीव एनर्जी उत्पन्न होती है, 
और वो हमारे शरीर में 
उस अनुसार hormones उत्पन्न करती है ।
75% बीमारियों का मूल कारण 
नकारात्मक सोंच से उत्पन्न ऊर्जा ही है ।
आज इंसान ही अपनी गलत सोंच से 
भस्मासुर बन खुद का विनाश कर रहा है ...

अपनी सोंच सदैव सकारात्मक रखें और खुश रहें...

Friday, August 26, 2022

प्यार मे विश्वास- गौरीशंकर चौबे

✨ *प्यार में विश्वास*

कृष्ण भोजन के लिए बैठे थे। एक दो कौर मुँह में लेते ही अचानक उठ खड़े हुए। बड़ी व्यग्रता से द्वार की तरफ भागे, फिर लौट आए उदास और भोजन करने लगे।
          रुक्मणी ने पूछा," प्रभु,थाली छोड़कर इतनी तेजी से क्यों गये ? और इतनी उदासी लेकर क्यों लौट आये?"
          कृष्ण ने कहा, " मेरा एक प्यारा राजधानी से गुजर रहा है। नंगा फ़कीर है। इकतारे पर मेरे नाम की धुन बजाते हुए मस्ती में झूमते चला जा रहा है। लोग उसे पागल समझकर उसकी खिल्ली उड़ा रहे हैं। उस पर पत्थर फेंक रहे हैं। और वो है कि मेरा ही गुणगान किए जा रहा है। उसके माथे से खून टपक रहा है। वह असहाय है, इसलिए दौड़ना पड़ा "
           " तो फिर लौट क्यों आये?"
कृष्ण बोले, " मैं द्वार तक पहुँचा ही था कि उसने इकतारा नीचे फेंक दिया और पत्थर हाथ में उठा लिया। अब वह खुद ही उत्तर देने में तत्पर हो गया है। उसे अब मेरी जरूरत न रही। जरा रूक जाता, मेरे ऊपर पूर्ण विश्वास रखता तो मैं पहुँच गया होता
यही पर आकर हम अपने भगवान् पर विश्वास खो देते है।भगवान् जरा सी परीक्षा लेते है और हम धैर्य नहीं रख पाते।इसलिए अपनी भक्ति एवम प्यार को दृढ बनाना चाहिए।

Thursday, August 18, 2022

अटूट विश्वास- गौरीशंकर चौबे

अटूट विश्वास
रात के ढाई बजे, एक सेठ को नींद नहीं आ रही थी, वह घर में चक्कर पर चक्कर लगाये जा रहा था, पर चैन नहीं पड़ रहा था, आखिर थक कर नीचे उतर आया और कार निकालकर शहर की सड़कों पर निकल गया, रास्ते में एक मंदिर दिखा, सोचा थोड़ी देर इस मंदिर में जाकर भगवान के पास बैठता हूँ, प्रार्थना करता हूं तो शायद शांति मिल जाये...
       सेठ मंदिर के अंदर गया तो देखा, एक इन्सान पहले से ही भगवान की मूर्ति के सामने बैठा था, मगर उसका उदास चेहरा, आंखों में करूणा का भाव दिख रहा था, सेठ ने पूछा क्यों भाई इतनी रात को मन्दिर में क्या कर रहे हो ?
      उस इन्सान ने कहा मेरी पत्नी अस्पताल में है, सुबह यदि उसका आपरेशन नहीं हुआ तो वह मर जायेगी और मेरे पास आपरेशन के लिए पैसा नहीं है...
      उसकी बात सुनकर सेठ ने जेब में जितने रूपए थे, वह उस आदमी को दे दिए, अब गरीब आदमी के चहरे पर चमक आ गईं थीं, सेठ ने अपना कार्ड दिया और कहा इसमें फोन नम्बर और पता भी है और जरूरत हो तो नि:संकोच बताना... 
      उस गरीब आदमी ने कार्ड वापिस दे दिया और कहा, मेरे पास उसका पता है, इसलिए साहब पते की जरूरत नहीं... 
      आश्चर्य से सेठ ने कहा, किसका पता है भाई, उस गरीब आदमी ने कहा, जिसने रात को ढाई बजे आपको यहां भेजा उसका, अगर ईश्वर पर इतना अटूट विश्वास हो तो सारे कार्य पूर्ण हो जाते हैं...
      ईश्वर में अटूट विश्वास और श्रध्दा रखते हुए अपना कार्य करते रहना चाहिए, जब भी मदद की आवश्यकता होगी ईश्वर किसी ना किसी रूप में आ कर मुश्किल वक्त से बहार निकलने का रास्ता बताएंगे, क्यूँकि आप भले ही लाखों की घड़ी हाथ में क्यूँ ना पहने हो, पर समय तो प्रभु के ही हाथ में हैं...
जय श्री कृष्ण.

Friday, July 22, 2022

भगवान की मजदूरी - Gaurishankar Chaubey

भगवान की मजदूरी

एक गरीब विधवा के पुत्र ने एक बार अपने राजा को देखा । 
राजा को देख कर उसने अपनी माँ से पूछा- माँ! क्या कभी मैं राजा से बात कर पाऊँगा ?
माँ हंसी और चुप रह गई ।
पर वह लड़का तो निश्चय कर चुका था । उन्हीं दिनों गाँव में एक संत आए हुए थे। तो युवक ने उनके चरणों में अपनी इच्छा रखी ।

संत ने कहा- अमुक स्थान पर राजा का महल बन रहा है, तुम वहाँ चले जाओ और मजदूरी करो । पर ध्यान रखना, वेतन न लेना । अर्थात् बदले में कुछ माँगना मत निष्काम रहना ।

वह लड़का गया । वह मेहनत दोगुनी करता पर वेतन न लेता ।

एक दिन राजा निरीक्षण करने आया । उसने लड़के की लगन देखी । प्रबंधक से पूछा- यह लड़का कौन है, जो इतनी तन्मयता से काम में लगा है ? इसे आज अधिक मजदूरी देना ।

प्रबंधक ने विनय की- महाराज! इसका अजीब हाल है, दो महीने से इसी उत्साह से काम कर रहा है । पर हैरानी यह है कि यह मजदूरी नहीं लेता । कहता है मेरे घर का काम है । घर के काम की क्या मजदूरी लेनी ?

राजा ने उसे बुला कर कहा- बेटा ! तू मजदूरी क्यों नहीं लेता ? बता तू क्या चाहता है ?

लड़का राजा के पैरों में गिर पड़ा और बोला- महाराज ! आपके दर्शन हो गए, आपकी कृपा दृष्टि मिल गई, मुझे मेरी मजदूरी मिल गई । अब मुझे और कुछ नहीं चाहिए ।

राजा उसे मंत्री बना कर अपने साथ ले गया । और कुछ समय बाद अपनी इकलौती पुत्री का विवाह भी उसके साथ कर दिया । राजा का कोई पुत्र था नहीं, तो कालांतर में उसे ही राज्य भी सौंप दिया ।
बिल्कुल इसी प्रकार से भगवान ही हम सभी के राजा हैं । और हम सभी भगवान के मजदूर हैं । भगवान का भजन करना ही मजदूरी करना है । संत ही मंत्री है । भक्ति ही राजपुत्री है । मोक्ष ही वह राज्य है ।

हम भगवान के भजन के बदले में कुछ भी न माँगें तो वे भगवान स्वयं दर्शन देकर, पहले संत से मिलवा देते हैं और फिर अपनी भक्ति प्रदान कर, कालांतर में मोक्ष ही दे देते हैं ।

वह लड़का सकाम कर्म करता, तो मजदूरी ही पाता, निष्काम कर्म किया तो राजा बन बैठा । यही सकाम और निष्काम कर्म के फल में भेद है।
"तुलसी विलम्ब न कीजिए, निश्चित भजिए राम।
जगत मजूरी देत है, क्यों राखे भगवान॥"

सदैव प्रसन्न रहिये!!
जो प्राप्त है-पर्याप्त है!!

Sunday, July 10, 2022

हकीकत

#हक़ीक़त

क्या आप जानते हैं कि आपके अंतिम संस्कार के बाद आम तौर पर क्या होगा??

कुछ ही घंटों में रोने की आवाज पूरी तरह से बंद हो जाएगी।

रिश्तेदारों के लिए खाना बनवाने या मंगवाने में जुटे जायेगा परिवार..

कुछ पुरुष सोने से पहले चाय की दुकान पर टहलने निकल जाएंगे।

कोई रिश्तेदार आपके बेटे या बेटी से फोन पर बात करेगा कि आपात स्थिति के कारण वह व्यक्तिगत रूप से नहीं आ पा रहा है।

और तो और इधर आपका मृत शरीर चिता पर जल रहा होगा, उधर आपको अंतिम विदाई देने आए लोगों में से कोई फोन पर किसी से बतिया रहा होगा, कोई वाट्स एप, फेसबुक पर व्यस्त होगा तो दूर झुंड बनाकर बैठे कुछ लोग घर परिवार, व्यवसाय, खेल आदि अन्य विषयों पर चर्चा कर रहे होंगे।
अगले दिन रात के खाने के बाद, कुछ रिश्तेदार कम हो जाएंगे, और कुछ लोग सब्जी में पर्याप्त नमक नहीं होने की शिकायत करते होंगे

भीड़ धीरे धीरे छंटने लगेगी..

आने वाले दिनों में
कुछ कॉल आपके फोन पर बिना यह जाने आ सकती हैं कि आप मर चुके हैं।

आपका कार्यालय या आपकी दुकान आपकी जगह लेने के लिए किसी ओर को ढूंढने में जल्दबाजी करेगा।

एक हफ्ते बाद आपकी मौत की खबर सुनकर,
आपकी पिछली पोस्ट क्या थी, यह जानने के लिए कुछ फेसबुक मित्र उत्सुकता से खोज कर सकते हैं।

 10 दिन बाद आपका बेटा और बेटी अपने अपने काम पर लौट आएंगे।

महीने के अंत तक आपका जीवनसाथी कोई कॉमेडी शो देख कर हंसने लगेगा।

सबका जीवन सामान्य हो जाएगा
आपको इस दुनिया में आश्चर्यजनक गति से भुला दिया जाएगा।

इस बीच आपकी प्रथम वर्ष पुण्यतिथि भव्य तरीके से मनाई जाएगी।पलक झपकते ही
साल बीत गए और आपके बारे में बात करने वाला कोई नहीं है।

एक दिन बस पुरानी तस्वीरों को देखकर आपका कोई बेहद करीबी आपको याद कर सकता है

लोग आपको आसानी से भूलने का इंतजार कर रहे हैं
फिर आप किसके लिए दौड़ रहे हो?
और आप किसके लिए चिंतित हैं?

क्या आप अपने घर,परिवार, रिश्तेदार को संतुष्ट करने के लिए जीवन जी रहे हैं? 

जिंदगी एक बार ही होती है, बस इसे जी भर के जी लो….
और जितना हो सके इसके परम उद्देश्य के जितना निकट पहुंच सको, पहुंचने का यत्न करे, जितना हो सके परमार्थ  कमा लो❤️
#स्वामीस्वर्गानन्द

Thursday, January 6, 2022

" ये कहानी आपके जीने की सोच बदल देगी "

     

एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया। 

वह बैल घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।  किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी।

जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया।  सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया...... अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।  

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ आता जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह बैल कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया | 

ध्यान रखे आपके जीवन में भी बहुत तरह से मिट्टी फेंकी जायेगी बहुत तरह की गंदगी आप पर गिरेगी जैसे कि,






आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही आपकी आलोचना करेगा. 

कोई आपकी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा.   

कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे... 

ऐसे में आपको हतोत्साहित हो कर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हर तरह की गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख ले कर उसे सीढ़ी बनाकर बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है। 






सकारात्मक रहे.. सकारात्मक जिए!

इस संसार में....

      सबसे बड़ी सम्पत्ति "बुद्धि "

      सबसे अच्छा हथियार "धैर्य"

      सबसे अच्छी सुरक्षा "विश्वास"

      सबसे बढ़िया दवा "हँसी" है

और आश्चर्य की बात कि "ये सब निशुल्क हैं "



"सोच बदलो जिंदगी बदल जायेगी"🙏